इतनी भीड़ में तेरा चेहरा अच्छा लगता है – Mukesh Alam

इतनी भीड़ में तेरा चेहरा अच्छा लगता है
बीच समन्दर एक जज़ीरा अच्छा लगता है
मुद्दत गुज़री आज अचानक याद आए हो तुम
गहरी रात के बाद सवेरा अच्छा लगता है
मुझको सूरज की चाहत थी लेकिन ज़ुल्फ़ तेरी
देखी जब से मुझे अँधेरा अच्छा लगता है
तुमने अता फ़र्माया है, सो मुझको है प्यारा
वर्ना किसको दिल में शरारा अच्छा लगता है
तेरी रानाई से आँखें जाग उठीं जब से
तब से मुझको आलम सारा अच्छा लगता है