कोई तेरे ग़म का मारा डूबने को है – Mukesh Alam

कोई तेरे ग़म का मारा डूबने को है
आस्माँ का तारा-तारा डूबने को है
उफ़! तेरी आँखों की गहराई में गहराई
कि समन्दर भी बेचारा डूबने को है
आ किनारे अपने-अपने हम तलाशें, चल
कुछ हमारा कुछ तुम्हारा डूबने को है
मेरे दिल को थाम ले ऐ नाख़ुदा-ए-दिल
ये सफ़ीना पारा-पारा डूबने को है
अक़्ल से दिल कह गया है क्या सरे-महशर
क़ारोबारे-इल्म सारा डूबने को है
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नाख़ुदा-ए-दिल=दिल का मल्लाह। सफ़ीना=कश्ती। सरे-महशर=क़यामतके वक़्त।