नफरतें तो मिली खूब

नफरतें तो मिली खूब, मगर मोहब्बत न मिली,
दिल को ज़ख्म तो मिले, मगर चाहत न मिली !
कैसे हैं #नसीब वाले वो कि हंस लेते हैं खुल कर,
एक हम हैं कि मुस्कराने की, मोहलत न मिली !
ढूंढते रहे #दुनिया में हम खुशियों का कोई कोना,
मगर अफ़सोस, उधर जाने की हिम्मत न मिली !
कचोटते रहते हैं #दिल को वो गुज़रे हुए लम्हात,
मगर कोशिश के बाद भी, इनसे फुर्सत न मिली !
सोचता था यारो कि न आये ख़म किसी रिश्ते में,
पर अफ़सोस, मेरे अहसास को इज़्ज़त नहीं मिली !!!