मुझे भी सीखनी है तुमसे

बुद्धा….
मुझे भी सीखनी है तुमसे
निरवाण और मोक्ष कि बातें
मुझे नही चाहिए खोखला किताबी ज्ञान
कि औरत भगवान का रूप है ,
बेटियां लक्ष्मी होती है
सच बोलो ,अपने धर्म का पालन करो…
कभी किसी का बुरा मत करो…
और ये भी कि मशीनों से जीवन आसान बनता है …
कहाँ जाती है ये सब बातें जब कोई दामिनी मरती है ,
जब मेरी बहन पैदा नही होती ,
बस कूड़े के डिब्बों में टुकड़े टुकड़े होकर मिलती है
कहाँ जाता है ये ज्ञान जब मजबूर आँखों को
सपने दिखाते “सच्चे लोग “… ईमान बेच देते है
मुझे तो कहीं नही दिखती
ऐसी लक्ष्मी बेटी जिसको कभी
किसी रावण की नज़र ने ना मापा हो …
हाँ कुछ मशीने जरुर बनी है
जिनमे से एक, धरती पे ऐसी चोट करती है
कि उसके आंचल पे दूध पीती औलाद को
पता भी नही चलता
कि वो कब मर गई …
और बेचारी माँ का सदमा…सदियों तक नही जाता….
बताओ न बुद्धा !
कि जब तुम्हारे पास ये मशीने न थी
तब भी क्या जीवन यूँ ही था…
भयभीत ,डरा सहमा हुआ…
जानते हो !
मुझे इन किताबों से प्यार था…
पर अव्वल आने का इनाम
बहुत दर्दनाक था…
लोग कहते है कि अब मैं बहुत डरावनी लगती हूँ…
तभी तो मैं किसी कि तरफ नही देखती…सिवाए तुम्हारे
पर तुम्हारे चेहरे पे भी घाव…!!!! क्या तुमपर भी किसी ने..????
नही नही…
तुम तो भगवान हो न…कुछ भी कर सकते हो
तो क्या समय को कुछ दिन पीछे ले जा सकते हो
ताकि मैं फिर से ” खुद ” को वैसे ही जी सकूं
अगर नहीं , तो मुझे भी दे देना मोक्ष और निरवाण…
अभी इसी वख्त…
और हाँ उस लड़के को माफ़ कर देना
वो मेरा दोस्त था…..SONIA BHARTI…