Mukesh Aalam – धूम तेरे सब दर्द मचाए बैठे हैं

धूम तेरे सब दर्द मचाए बैठे हैं
सारे ग़म मजलिस में आए बैठे हैं
पैमाने, मैख़ाने, साक़ी और ख़ुद हम
तेरी नज़र की आस लगाए बैठे हैं
तेरी नसीहत शैख़! कि यूँ कर, यूँ मत कर
और इधर हम घर ही लुटाए बैठे हैं
राह में तेरी, मन्दिर, मस्जिद, दीन, धरम
कितनी दीवारों के साए बैठे हैं
बच कर चलना ‘आलम’ प्यार की राहों में
झूठे सब बाज़ार लगाए बैठे हैं